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शस्त्रेण रक्षिते राष्ट्रे शास्त्र चिंता प्रवर्तते’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कारगिल विजय दिवस स्मृतिका युद्ध स्मारक पर पुष्प गुच्छ अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने
कहा कि भारत दुनिया का ऐसा देश है, जिसने कभी भी किसी पर जबरन एकाधिकार करने का कभी प्रयास नहीं किया। बल,बुद्धि, विद्या में सिरमौर रहे भारत ने जबरन एकाधिकार का एक भी उदाहरण प्रस्तुत नहीं किया है। लेकिन जब भी किसी आक्रांता ने हमारी शान्ति, सद्भावना का दुरूपयोग करने का दुस्साहस किया तो भारत माता के बहादुर जवानों ने सदैव मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करते हुए किसी प्रकार की कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। आजादी के बाद हर युद्ध में हमारे बहादुर जवानों ने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया है। भारत की परम्परा रही है कि ‘शस्त्रेण रक्षिते राष्ट्रे शास्त्र चिंता प्रवर्तते’ अर्थात शस्त्र से रक्षित राष्ट्र ही शास्त्र चिन्तन के माध्यम से समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हम सबका सौभाग्य है कि यह वर्ष कारगिल विजय दिवस का रजत जयन्ती वर्ष है। हम दुनिया को बता सकते हैं कि युद्ध हम पर थोपा गया था। दुनिया की कोई ताकत या दुश्मन हम पर युद्ध थोप सकता है, लेकिन परिणाम हमारे बहादुर जवान ही तय करेंगे।
तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने इस युद्ध को विजय दिवस के रूप में घोषित करते हुए भारत के बहादुर जवानों को नमन किया था। इस युद्ध के दौरान भारतीय सेना नेे शौर्य एवं पराक्रम का अद्भुत प्रदर्शन करते हुए सम एवं विषम परिस्थितियों में एक समय सीमा के अन्दर युद्ध के परिणाम को भारत के पक्ष में करते हुए दुनिया के सामने अपने शौर्य और अद्भुत साहस का परचम लहराने का कार्य किया था। दुनिया की बड़ी-बड़ी ताकतें इस युद्ध में हस्तक्षेप करना चाहती थी, लेकिन किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप के बिना भारत ने इस युद्ध को अपने पक्ष में मोड़ा था।

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